कोई नहीं चाहता कि उस पर हुकुम चलाया जाये ।



एक बार मैं अपने एक पुराने दोस्त से मिला जो मुंबई में किसी कंपनी में job करता था। तो वह अपने बॉस की तारीफ कर रहा था। की मेरे बॉस दुनिया के सबसे अच्छे बॉस हैं। मैंने कहा तुम्हे ऐसा क्यों लगता है। क्यूंकि हमलोग तो आमतौर पर यह जानते हैं की बॉस खड़ूस होते हैं और सिर्फ अपना काम करवाना जानते हैं उसे अपने कर्मचारियों की कोई परवाह नहीं होती है इसपर मेरे दोस्त अमर ने कहा हाँ पहले मुझे भी ऐसा ही लगता था। पर उनमे एक ऐसी बात थी जो मैंने और किसी में नहीं देखि है। अमर ने बताया की मैं इस कंपनी में पिछले 5 साल से काम कर रहा हूँ पर आज तक मैंने उन्हें कभी किसी कर्मचारी को सीधे आदेश देते नहीं देखा। 

वे हमेसा सुझाव देते थे , उन्होंने अपने अधीनस्थ कर्मचारी को कभी आदेश नहींनहीं दिया।  उसके बॉस कभी नहीं कहते थे, "ऐसा करो या यह करो ,"या  "यह मत करो या ऐसा मत करो ," इसके बजाय वे कहते थे , "आप इस पर विचार कर सकते हैं," या "क्या आपको लगता है कि यह काम करेगा ?"अक्सर पत्र डिटेक्ट करने के बाद वे अपने अधीनस्थ कर्मचारी से पूछते थे आपको यह कैसा लगा अपने किसी अधीनस्थ द्वारा लिखे गए पत्र को पढ़ने के बाद वे कहते थे शायद इस वाक्यांश को इस तरह लिखना बेहतर रहेगा वह हमेशा लोगों को खुद अपनी गलती सुधारने का मौका देते थे उन्होंने कभी अपने अधीनस्थों को काम करने का आदेश नहीं दिया।  वे लोगों को अपना काम करने देते थे, ताकि वे अपनी गलती से खुद सीख सकें ।।    
                                                                                             इस तरह की तकनीक से सामने वाले के लिए अपनी गलती सुधारना आसान होता है । इससे उसके सम्मान को ठेस नहीं पहुँचती और उसमें महत्त्वपूर्ण होने की भावना जागृत होती है । इससे विद्रोह कि नहीं सहयोग की भावना को बल मिलता है ।।                        

                               मैंने यह देखा है की सख्त आदेश के कारण उत्पन्न आक्रोश कई बार बहुत लंबे समय तक बना रहता है चाहे वह आदेश किसी स्पष्ट रूप से गलत चीज को ठीक करने के लिए ही  दिया गया हो । एक बार मेरे स्कूल में एक लड़के ने अपनी bike को गलत जगह पर खड़ी कर दी थी । जिस वजह से आने-जाने में असुविधा हो रही थी। एक दूसरे  शिक्षक क्लास रूम में तेजी से आये  और उन्होंने डांटते हुए पूछा किसकी bike  रास्ते में खड़ी है जब bike वाला लड़का  खड़ा हुआ , तो शिक्षक ने चिल्लाकर कहा ,उस bike को वहां से तत्काल हटा दो, नहीं तो मैं उसको बाहर फेंकवा दूंगा । "             
                                                            गलती विद्यार्थी की थी उसे वहां bike खड़ी करनी नहीं चाहिए थी ।परंतु उस दिन के बाद से मैंने देखा की ना सिर्फ वह विद्यार्थी उस शिक्षक  से चिढ़ने लगा बल्कि उस क्लास के सभी विद्यार्थी उस टीचर से द्वेष रखने लगे । इस घटना के बाद उन्होंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि वे उस शिक्षक को तंग करें और उसके सामने परेशानियां खड़ी करें ।                                               

  इस बात को दूसरी तरह  से भी कहा जा सकता था। वह दोस्ताना तरीके से भी पूछ सकते थे।  "रास्ते में खड़ी bike  किसकी है ?" और उसके बाद यह सुझाव दे सकते थे।  कि अगर बाइक  वहां से हटा दी  जाए तो दूसरी गाड़ियों  को आने-जाने में सुविधा होगी। यह सुनकर  विद्यार्थी खुशी-खुशी बाइक  हटा लेता वह और उसके सहपाठी  उस शिक्षक से बिल्कुल भी नहीं चिढ़ते। 

 प्रश्न पूछने से ना सिर्फ आदेश अधिक आनंददायक हो जाता है ,बल्कि उससे अक्सर सामने वाले की रचनात्मकता भी प्रेरित होती है अगर लोगों को यह लगने लगे कि उस निर्णय को लेने में उनका हाथ है, तो वे अधिक अच्छे ढंग से काम को करेंगे। 

मेरे दोस्त अमर ने बताया की  हाँ  एक बात मैं आपलोगों को बताना ही भूल गया की अमर जिस कंपनी में काम करता था वो मशीन के पार्ट बनाने की फैक्ट्री थी।  उस कंपनी को एक बहुत बड़ा ऑर्डर मिलने वाला था शर्त यह थी कि उन्हें माल बहुत कम समय में सप्लाई करना था। वे  जानते थे कि वे इतने कम समय में माल सप्लाई नहीं कर पाएंगे फैक्ट्री में पहले मिले आर्डर का माल बन रहा था। और इस बड़े आर्डर की समयसीमा इतनी  कम थी कि Boss  को यह काम असंभव लग रहा था। 

 बॉस  ने मजदूरों को तेज रफ्तार से काम करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए नहीं कहा। इसके बजाय उसने सबको इकट्ठा किया और उन्हें पूरी स्थिति बताई।  उसने बताया कि अगर यह आर्डर उन्हें  मिल जाता है तो इससे कंपनी को बहुत लाभ होगा। और अगर वे इसे समय पर दे पाते हैं तो इससे उन्हें भी लाभ होगा। फिर उसने सवाल पूछना शुरू किया ,

  "क्या हम ऐसा कुछ कर सकते हैं कि हमें यह आर्डर मिल जाए ?"  
 क्या किसी के दिमाग में ऐसा कोई तरीका है जिससे यह आर्डर लेना और उसे समय पर पूरा करना संभव है?"

क्या कोई तरीका है जिससे हम अपने काम के समय में बदलाव करके इसे समयसीमा में पूरा कर सकें ?"

 कर्मचारियों ने कई सुझाव दिए और उन्होंने जोर देकर कहा कि ऑर्डर ले लेना चाहिए। उन्होंने "हम यह कर सकते हैं "की भावना के साथ काम किया और आर्डर ना सिर्फ मिल गया बल्कि माल का उत्पादन और डिलीवरी  भी समय पर हो गया।  प्रभावी  लीडर यह करता है। ... 

                                                            "  सीधे आदेश देने के बजाय प्रश्न पूछे। "

इस पोस्ट में मैंने यह बताने की कोशिश की है की किसी पर भी अगर आप हुक्म चलाएंगे तो इसका उसपर ख़राब प्रभाव पढता है। जिसमे मैंने अपने जिंदगी से जो कुछ अनुभव पाया है।  वो मैंने आपसे जिक्र किया। और मैंने अपने अनुभव से यह भी बताने की कोशिश की है की लोगों से अगर आपको कोई काम करवाना है तो कैसे उससे वर्ताव करना चाहिए 



 

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