शिकायतों से निपटने का आसान तरीका।



ज़्यादातर लोग दूसरों से अपनी बात मनवाने के लिए बहुत बोलते है। इसके बजाय आपको सामने वाले को ज़्यादा बोलने का मौका देना चाहिए। वे अपने बिज़नेस और अपनी समस्या के बारे में आपसे ज़्यादा जानते हैं। इसलिए आप उनसे सवाल पूछिए। उन्हें अपनी बात कहने दीजिये। 

अगर आप उनसे असहमत हो,तो आपमें यह इक्षा जाग सकती है की आप उनकी बात बीच में ही काट दें। परन्तु ऐसा बिलकुल न करे। यह एक खतरनाक आदत है चुकीं उनके दिमाग में बहुत से विचार होते हैं जिन्हें वे व्यक्त करना चाहते हैं ,इसलिए वे आपकी बातों पर ध्यान नहीं देंगे। उचित यही होगा की आप उनकी बात धैर्य और ध्यान से सुने। इस बारे में गंभीर रहें।  उन्हें अपने विचारों को पूरी तरह से वयक्त करने के लिए प्रोत्साहित करें। 

क्या यह तरीका Business  में काम आता है ? आइये देखते हैं। यहाँ एक Salesman  की कहानी है, जिसे मजबूरन चुप रहना पड़ा। 

अमेरिका के एक बड़े Automobile  निर्माता को साल भर के लिए फैब्रिक्स की जरूरत थी। तीन महत्वपूर्ण निर्माताओं ने अपने सैंपल भेजे। Motor Company  के एक्ज़ीक्युटिव  ने उनकी जांच की।  इसके बाद हर निर्माता को एक नोटिस भेजा गया की एक निश्चित दिन उन्हें अवसर दिया जाएगा ताकि वे अपने contract पर अंतिम विवरण दे सकें। 

विस्तृत विवरण देने के लिए तीनोँ कंपनियों के निर्माताओं के प्रतिनिधि निश्चित दिन उपस्थित हुए। संयोग से जीबीआर नामक प्रतिनिधि को लॉरिंगाइटिस का सीरियस अटैक पड़ गया और उसका गाला ख़राब हो गया। "जब कॉन्फ्रेंस में एक्सिक्यूटिव के सामने बोलने की विल्सन की बारी आई ," मिस्टर आर.ने मेरी क्लास में यह प्रसंग सुनाया ,"तो विल्सन की आवाज़ नहीं निकल रही थी। विल्सन मुश्किल से फुसफुसा पा रहा था। विल्सन को एक कमरे में ले जाया गया और विल्सन वहां पर अपने आपको Tax tile  engineer ,Purchasing Agent ,Sales director तथा company के president  के सामने खड़ा पाया। विल्सन बोलने के लिए खड़ा हुआ,और विल्सन बहादुरीपूर्वक अपनी बात रखने की कोशिश की , परन्तु विल्सन कुछ शब्दों से ज़्यादा नहीं बोल पाया। 

    " वे सब लोग एक टेबल के चारों तरफ बैठे हुए थे ,इसलिए विल्सन ने एक कागज पर लिख दिया ,'मेरा गला ख़राब है। मैं बोल नहीं सकता। '

"कंपनी के प्रेजिडेंट ने कहा आपकी तरफ से मैं बोलूंगा।  और उन्होंने बोलना शुरू कर दिया। उन्होंने विल्सन के  सैंपल दिखाए और उनकी विशेस्ताएं बताई। विल्सन के product की गुणवत्ता पर एक बहस छिड़ गई। और चूँकि प्रेसिडेंट विल्सन के बदले में बोल रहे थे ,इसलिए उन्होंने चर्चा में विल्सन का ही प्रतिनिधि किया। पूरी चर्चा में विल्सन की भागदारी सिर्फ कुछ मुस्कुराहटों ,सिर हिलाने और चेहरे के हावभाव तक ही सीमित थी। 

"इस अद्भुत मीटिंग की वजह से विल्सन को contract मिल गया। 5 लाख गज अपहोल्स्ट्री फैब्रिक्स का order ,जिसकी कुल कीमत 1600000 डॉलर थी। यह अब तक मिला विल्सन की जिंदगी का सबसे बड़ा order था। 

 "विल्सन जानता था। की अगर उसका गला नहीं बैठता तो उसके हाथ से contract निकल जाता। इसलिए ,क्यूंकि पुरे मामले के बारे में विल्सन के विचार ही गलत थे। भाग्यवश  ही वह समझ पाया की कई बार दूसरे वयक्ति के बोलने से हमे ज़्यादा फायदा होता है। " 

         बिजनेस की ही तरह परिवार में भी हमें दूसरों की बातें सुनने से ज्यादा फायदा होता है अपनी पुत्री से सुनीता  के संबंध तेजी से बिगड़ रहे थे स्वेता पहले एक शांत और अच्छी बच्ची हुआ करती थी। परंतु अब वह चिड़चिड़ी और  असहयोगी Teenager  में बदल चुकी थी। सुनीता ने उसे डांटा डराया-धमकाया समझाया परंतु कोई फायदा नहीं हुआ। 

सुनीता ने हार मान ली स्वेता को एक दिन मैंने बाहर जाने के लिए मना किया, परंतु उसने मेरा कहना नहीं माना और वह घर का काम करने से पहले अपनी सहेली से मिलने के लिए चली गई। जब लौटी तो मैं दस हज़ारवीं बार  उसपर चीखना चाहती थी। परंतु मुझमे डांटने की ताकत ही नहीं बची थी। मैंने उसकी तरफ दुख से देखा और सिर्फ इतना कहा 'क्यों स्वेता क्यों ?

 स्वेता  ने मेरी स्थिति देखी और मुझसे शांत स्वर में पूछा क्या आप सच में जाना चाहती हैं ? मैंने हां में सर हिलाया इसके बाद स्वेता ने  पहले तो झिझकते हुए अपनी बात शुरू की परंतु कुछ ही देर में उसके मन का सारा गुबार  निकल गया। मैं उसकी बात कभी नहीं सुनती थी। जब  वह मुझे अपने विचार और भावनाएं बताना चाहती थी। तब मैं उसे आदेश देकर चुप कर देती थी।  मुझे इस बात का अहसास हुआ कि मेरी बेटी मुझसे यह चाहती थी कि मैं एक दोस्त की तरह व्यवहार करू, जबकि मैं डांटने वाली मां का रोल निभा रही थी।  वह मेरे साथ किशोरावस्था के तनाव को बांटना चाहती थी। मैं हमेशा उसके सामने बोलती ही रहती थी, जबकि मुझे उसकी बात सुननी चाहिए थी मैं उसकी बात सुनने की तरफ कभी ध्यान ही नहीं देती थी। 

" उस दिन के बाद से मैंने उसकी बात सुनना शुरू कर दिया। अब वह मुझे बता देती है कि उसके दिलो दिमाग में क्या चल रहा है। और अब हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं। अब वह फिर से सुधर गई है। "

न्यूयार्क के एक अखबार के फ्रंट पेज पर एक बड़ा विज्ञापन छपा जिसमें नौकरी के लिए बहुत ही योग्य और अनुभवी उम्मीदवार चाहा गया था। चार्ल्स टी  ने दिए गए बॉक्स नंबर पर अपना आवेदन भिजवा दिया। कुछ दिनों बाद उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। जाने से पहले उसने उस कंपनी और वहां के मालिक के बारे में वॉल स्ट्रीट से हर संभव जानकारी हासिल करने की कोशिश की इंटरव्यू के दौरान उसने कहा आपकी कंपनी का रिकार्ड इतना अच्छा है कि इसके साथ जुड़कर मुझे गर्व होगा। मेरे ख्याल से आपने 28 साल पहले सिर्फ एक डेस्क रूम और एक स्टेनोग्राफर के साथ अपना बिजनेस शुरू किया था क्या यह सही है? 

हर सफल व्यक्ति को अपने शुरुआती संघर्ष के बारे में बात करना अच्छा लगता है यह व्यक्ति भी इसका अपवाद नहीं था उसने लंबे समय तक अपनी कहानी सुनाई कि किस तरह उसने $450 और एक सपने के साथ अपने बिजनेस यात्रा शुरू की थी उसने बताया कि आलोचना, माखोल  और निराशा के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी थी शुरु शुरु में तो उसे 1 दिन में 16 घंटे तक काम करना पड़ता था और वह रविवार छुट्टियों के दिन भी काम करता था। आखिरकार उसने किला फतह कर लिया और अंततः आज वह इस स्थिति में पहुंच गया। कि वॉल स्ट्रीट के सबसे महत्वपूर्ण एग्जीक्यूटिव उससे  सलाह और मार्गदर्शन लेने के लिए आते हैं। उसे अपने रिकॉर्ड पर गर्व था। उसे होना ही चाहिए था और इसके बारे में बताना  उसे अच्छा लगा अपनी कहानी सुनाने के बाद उसने आखिर में चार्ल्स टी से संक्षेप में उसके अनुभव के बारे में पूछा और अपने वॉइस प्रेजिडेंट को बुलाकर कहा ," मुझे लगता है कि हमें इसी इंसान की तलाश थी। "

मिस्टर चार्ल्स टी ने  अपने संभावित मालिक के बारे में सारी जानकारी हासिल करने का कष्ट उठाया था। उसने सामने वाले व्यक्ति में और उसकी समस्याओं में रुचि ली थी। उसने सामने वाले व्यक्ति को बोलने के लिए प्रोत्साहित किया था और इसी कारण उसका अच्छा प्रभाव पड़ा और उसे सुखद परिणाम मिला। 

               "फ्रांसीसी दार्शनिक ला रोशफूको  ने कहा था,  " अगर आप दुश्मन बनाना चाहते हैं, तो अपने दोस्तों से आगे निकल जाएँ।  अगर आप दोस्त बनाना चाहते हैं तो अपने दोस्तों को खुद से आगे निकल जाने दो। "

क्या यह सच है? हां क्योंकि अगर आपके दोस्त आप से आगे निकल जाते हैं। तो वे खुद को महत्वपूर्ण समझते हैं परंतु जब आप उनसे आगे निकल जाते हैं तो वे -  या कम से कम उनमें से कुछ हीन  और ईर्ष्यालु महसूस कर सकते हैं। 

                  "सामने वाले व्यक्ति को ज्यादा बातें करने दें"

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