एडमिरल पियरी


                                                                    
  एडमिरल पियरी (1856 -1920)

एडमिरल पियरी , वे खोजी जिन्होंने 6 अप्रैल 1909 को अपने कुत्ते के साथ उत्तरी ध्रुव पर पहुंच कर दुनिया को आश्चर्यचकित और रोमांचित कर दिया  - एक ऐसा लक्ष्य जिसे हासिल करने के लिए सदियों तक बहादुर आदमियों ने कष्ट झेले, भूख से तड़पे और अपनी जान  गवां दी। पियरी भी ठण्ड और भूख  लगभग मरते मरते बचे और उनके पैर की 8 उँगलियाँ ठण्ड के मारे इतनी ठिठुर गई की उन्हें काटना पड़ा। उन्हें इतनी विपत्तियों का सामना करना पड़ा की वे डर रहे थे की कहीं पागल न हो जाएँ।। 

वाशिंगटन में उनके वरिष्ठ अफसर जल भून रहे थे।  क्यूंकि पियरी को इतना प्रचार और सोहरत मिल रही थी। इसलिए उन्होंने यह आरोप लगाया की उसने वैज्ञानिक अभियानों के लिए पैसा इकठ्ठा किया और वह "आर्कटिक  में पड़ा हुआ है  और आवारागर्दी कर रहा है " और उन्हें इस बात पर विश्वास था क्योंकि आप जो विश्वास करना चाहते है ,उस पर विश्वास न करना लगभग असंभव होता है। पियरी को अपमानित करने और निचा दिखाने का उनका संकल्प इतना हिंसक था की सिर्फ राष्ट्रपति मैक्किनले के सीधे आदेश के वजह से ही पियरी आर्कटिक में अपना अभियान जारी रख पाए।  
         अगर पियरी वाशिंगटन में नौसेना विभाग में क्लर्क की नौकरी कर रहे होते , तो क्या उनकी इतनी जबरदस्त आलोचना हुई होती ? नहीं। वे इतने महत्वपूर्ण नहीं होते की लोग उनसे ईर्ष्या करते ?

         अतः  आप जीवन में जितने सफल और महत्वपूर्ण बनते हैं आपकी आलोचना भी उतनी ही होती है। इसलिए    कभी आलोचना से घबराये नहीं और आगे बढ़ते रहें। 

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