एक पत्रकार Edward



सालों पहले की बात है ,एक गरीब  बालक स्कूल के बाद अपने परिवार की मदद करने के लिए बेकरी शॉप की खिड़कियां धोया करता था।  उसका परिवार इतना गरीब था।  कि इसके अलावा वह हर रोज सड़क पर बाल्टी लेकर घूमता था। ताकि कोयले की गाड़ियों से गटर में गिरे कोयले के टुकड़ों को जमा कर सके। 

इस बालक एडवर्ड  को अपने जीवन में 6 वर्ष का स्कूल जीवन ही नसीब हुआ। परंतु अंततः वह  अमेरिकी पत्रकारिता के इतिहास में सर्वाधिक सफल मैगजीन संपादकों में से एक बन गया। ऐसा किस तरह हुआ।  यह 1 लंबी कहानी है परंतु इसकी शुरुआत किस तरह हुई है संक्षेप में बताया जा सकता इस पोस्ट  में दिए गए सिद्धांतों का प्रयोग करके उन्हें पहला अवसर मिला। 

उन्होंने 13 वर्ष की उम्र में स्कूल छोड़ दिया था।  वे वेस्टर्न यूनियन में ऑफिस बॉय बन गए परन्त्तु उन्होंने शिक्षा के विचार को एक पल के लिए भी अपनी नजरों से ओझल नहीं होने दिया। इसके बजाय उन्होंने खुद को शिक्षित करना आरंभ किया। उन्होंने अपनी यात्राओं का खर्च बचाया और बिना लंच के समय गुजारा ताकि उनके पास अमेरिकी जीवन का एक इनसाइक्लोपीडिया खरीदने लायक पैसा बच जाये -

और इसके बाद उन्होंने एक आश्चर्यजनक काम किया जिसके बारे में पहले कभी नहीं सुना गया था। उन्होंने प्रसिद्ध लोगों की जीवनी पढ़ी और महान लोगों को पत्र में लिखा कि वे अपने बचपन के बारे में बताएं। एडवर्ड  एक अच्छे श्रोता थे।  उन्होंने प्रसिद्ध लोगों से खुद के बारे में बताने का अनुरोध किया उन्होंने जनरल जेम्स गारफील्ड़  को पत्र लिखा जो उस वक्त प्रेजिडेंट पद के लिए अभियान चला रहे थे। और पूछा कि क्या यह सच है कि वे कभी नहर पर काम किया करते  थे।  गारफील्ड  ने इस पत्र का जवाब दिया उसने जनरल ग्रांट  से एक विशेष युद्ध के बारे में पूछा और ग्रांट ने उसके लिए नक्शा बनाया और इस 14 साल के बच्चे को डिनर पर बुलाया और पूरी शाम उससे बातें की 

जल्द ही वेस्टर्न यूनियन का यह  मैसेंजर बॉय देश के बहुत प्रसिद्ध व्यक्तियों से पत्र व्यवहार कर रहा था। राल्फ वाल्डो इमर्सन ,ओलिवर वेंडेल होम्स, लोंगफेलो, मिसेज अब्राहम लिंकन, लुईसा अलकॉट, जनरल शरमैन और जेफरसन डेविस ,ना सिर्फ  प्रसिद्ध हस्तियों से पत्र व्यवहार करता था बल्कि छुट्टियां मिलने पर वह उनके घर भी जाता था और उसका अतिथि के रुप में हर जगह स्वागत होता था। इस अनुभव से उसमें  वह आत्मविश्वास आ गया जो कि बहुमूल्य था। इन प्रसिद्ध व्यक्तियों ने उसमें वह  दृष्टि और महत्वाकांक्षा भर दी जिससे उसके जीवन का नक्शा ही बदल गया। और यह सब मैं इस बात को दोहराना चाहता हूं सिर्फ इसलिए संभव हुआ क्योंकि उसने यहां दिए गए सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारा था। 

आइसैक मार्कोस  नामक पत्रकार ने सैकड़ों प्रसिद्ध हस्तियों के इंटरव्यू लिए हैं उनका मानना है कि कई लोग इसलिए अच्छा प्रभाव नहीं छोड़ पाते क्योंकि वह ध्यान से सुनते ही नहीं है उनका पूरा ध्यान तो इस बात पर ही लगा रहता है कि वह क्या बोलने वाले हैं इसलिए वे अपने कान खुले नहीं रखते। .... अति महत्वपूर्ण लोगों ने मुझे यह बताया है कि उन्हें अच्छे वक्ताओं की तुलना में अच्छे श्रोता ज्यादा पसंद आते हैं।  परंतु सुनने की कला आज दूसरी किसी भी कला से ज्यादा दुर्लभ है। 

और केवल महत्वपूर्ण लोग ही अच्छे श्रोता को पसंद नहीं करते समान लोग भी उन्हें पसंद करते हैं रीडर्स डाइजेस्ट में एक बार लेख छपा था :-  

                         " कई लोगों को जब श्रोताओं की जरूरत होती है तो वे डॉक्टर को बुला लेते हैं"

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