Secrets of the Millionaire Mind In HIndi

 Millionaire Mind


हम द्वैत यानी सिक्के के दो पहलू की दुनिया में रहते हैं : ऊपर और नीचे, प्रकाश और अंधकार, गर्मी और ठंड , अंदर और बाहर, तेज और धीमा , दायाँ  और बायाँ।ये हजारों विपरीत ध्रुवों के सिर्फ कुछ उदाहरण हैं।  एक ध्रुव के अस्तित्व के बिना दूसरे ध्रुव का होना संभव नहीं है। अगर बाईं तरफ नहीं है,तो क्या दाईं तरफ संभव है ? संभव ही नहीं  है। 
                   इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि  जिस तरह धन के" बाहरी" नियम होते हैं उसी तरह इसके  "अंदरूनी" नियम भी  होने ही चाहिए। बाहरी  नियमों में व्यवसायिक ज्ञान, धन का प्रबंधन और निवेश तकनीकें जैसी चीजें शामिल है यह अनिवार्य है लेकिन अंदरूनी खेल भी उतना ही महत्वपूर्ण है।  इसका एक उदाहरण कारपेंटर और उसके औजार हैं। बेहतरीन औजार  जरूरी है।   लेकिन उस औजारों का कुशलता से प्रयोग कर सकने वाला बेहतरीन कारपेंटर बनना  उनसे भी ज्यादा जरूरी है। 
  मैं एक बात अक्सर कहता  हूं : "सही समय पर सही जगह होना ही काफी नहीं है। आपको सही समय और सही जगह पर सही व्यक्ति बनना होगा। "
 तो आप कौन हैं? आप जिस तरह सोचते हैं? आपकी धारणाएँ क्या हैं? आपकी आदतें और खूबियां क्या है?  आप अपने बारे में सचमुच कैसा महसूस करते हैं? आपको खुद पर कितना भरोसा है? दूसरों के साथ आपके कैसे संबंध हैं? आप दूसरों पर कितना भरोसा करते हैं? क्या आप वाकई यह महसूस कर सकते हैं कि आप दौलत के हकदार या काबिल हैं? डर, चिंता, असुविधा, परेशानी के बावजूद आप कितना काम कर सकते हैं? क्या आप मूड ना होने पर भी काम करते हैं? 
सच तो यह है कि आपका चरित्र सोच और विश्वास आपकी सफलता के स्तर को निर्धारित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
 मेरे एक प्रिय लेखक स्टुअर्ट वाइल्ड ने कहा था : "सफलता की कुंजी अपनी उर्जा बढ़ाना है ऐसा करने पर लोग स्वाभाविक रूप से आप की ओर आकर्षित होंगे और जब वह आने लगे तो उन्हें बिल थमा दे!"

     " आपकी आमदनी उसी हद तक बढ़ सकती है जिस हद तक आप बढ़ सकते हैं ! "  

      आपका धन का ब्लूप्रिंट महत्वपूर्ण क्योँ है ? 

क्या आपने उन लोगों के बारे में सुना है, जिन्होंने खुद को वित्तीय रूप से "बर्बाद" कर डाला है  ? क्या आपने इस बात पर गौर किया है कि कुछ लोगों के पास ढेर सारा पैसा तो आ जाता है, लेकिन वै उसे गवा देते हैं? या फिर कुछ लोगों के पास बेहतरीन अवसर होते हैं और उनकी शुरुआत भी अच्छी होती है लेकिन बाद में सब कुछ टॉय टॉय   फिश हो जाते हैं ? अब आप असली वजह जानते हैं। बाहर से तो यह बदकिस्मती ,अर्थव्यवस्था के मंदी या बुरा पार्टनर या चाहे जो दिख सकता है। बहरहाल, अंदर की तरफ यह एक अलग ही मामला है. अगर आपके पास बहुत सा पैसा आ जाए, लेकिन आप भीतर से इसके लिए तैयार न हो,  तो इस बात की संभावना है कि दौलत आपके पास ज्यादा देर तक नहीं टिकेगी और आप इसे गवा देंगे। 

ज़्यादातर लोगों के पास ढेर सारे पैसे बनाने और रखने की आंतरिक क्षमता ही नहीं होती है। उनके पास ज्यादा दौलत और सफलता के साथ आने वाली चुनौतियां से निपटने का माद्दा ही नहीं होता है. मेरे दोस्त ,यही वह मूल कारण है, जिस कारण से उनके पास कभी ज्यादा पैसा नहीं होता है। 
 लॉटरी जीतने वाले इसका आदर्श उदाहरण है. शोध से बार-बार पता चला है की लॉटरी जीतने वाले चाहे जितनी बड़ी राशि जीत लें  उनमें से ज्यादातर अंततः अपनी पुरानी वित्तीय अवस्था में लौट आते हैं यानी उतनी  धनराशि पर जितनी के साथ वे आराम देह  रहते हैं.

 दूसरी तरफ खुद के दम पर Millionaire  बनने वालों के साथ इसका उल्टा होता है।  ध्यान दें कि जब सेल्फ- मेड मिलेनियर पैसा गवा देते हैं, तो आमतौर पर वे इसे बहुत कम समय में ही वापस भी पा लेते हैं Donald Trump  इसका बेहतरीन मिसाल है Trump  के पास Billion Doller  थे ,उनका सारा पैसा डूब गया, लेकिन कुछ साल बाद उन्होंने ना सिर्फ डूबी दौलत पाली, बल्कि उससे भी ज्यादा कमा लिया। 
 ऐसा क्यों होता है ? इसका कारण यह है कि हालांकि कुछ सेल्फ मेड मिलेनियर पैसा तो गवा देते हैं लेकिन वह अपनी सफलता के सबसे महत्वपूर्ण तत्व को कभी नहीं गवाते हैं ,:उनका मिलेनियर मस्तिष्क जाहिर है। "डोनाल्ड "के मामले में यह उनका "Billionaire Mind " है क्या आपको एहसास है कि डोनाल्ड ट्रंप कभी सिर्फ Millionaire  बनकर खुश नहीं रह सकते थे। अगर Donald Trump  की कुल संपत्ति सिर्फ एक मिलियन डॉलर होती तो आपके हिसाब से वह अपनी वित्तीय सफलता के बारे में कैसा महसूस करते? ज़्यादातर  लोगों की राय यही होगी कि वे शायद खुद को दिवालिया और वित्तीय दृष्टि से असफल मानते हैं ! 

ऐसा इसलिए है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप का वित्तीय थर्मोस्टेट मिलियनों  नहीं बल्कि बिलियन पर आधारित है ज्यादातर लोगों का वित्तीय थर्मोस्टेट  Million  नहीं हजारों डॉलर कमाने पर निर्धारित होता है।  कुछ लोगों का वित्तीय थर्मोस्टेट हजारों पर भी नहीं बल्कि सैकड़ों पर निर्धारित होता है।  जबकि कुछ का वित्तीय थर्मोस्टेट तो  शून्य से भी नीचे निर्धारित है।  वे लोग बुरी तरह ठिठुर रहे हैं लेकिन उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं है कि ऐसा क्यों हो रहा है! 

 सच्चाई यह है कि ज्यादातर लोग कभी अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच ही नहीं पाते ज्यादातर लोग सफल नहीं है. शोध से पता चलता है कि 80% लोग कभी भी अपनी मनचाही जिंदगी जीने के लिए वित्तीय रूप से स्वतंत्र आत्मनिर्भर नहीं बन पाएंगे और यह 80% लोग कभी सचमुच सुखी होने का दावा भी नहीं कर पायेँगे। 
 कारण आसान है. अधिकांश लोग बेहोशी में जी रहे हैं वह" स्टियरिंग  व्हील" पर झपकी ले रहे हैं. वे जीवन के सतही  स्तर पर काम करते और सोचते हैं -जो सिर्फ उस पर आधारित होता है जिसे वे देख सकते हैं वे सिर्फ ऊपरी तौर पर दिखाई देने वाले संसार में जीते हैं। 

                फल तो जड़ों से मिलते हैं 

एक पेड़ की कल्पना करें। मान लें कि यह जीवन का पेड़ है। इस पेड़ पर फल लगे हैं। जीवन में हमारे फल हमें मिलने वाले परिणाम है। हम इन फलों (अपने परिणामों )को देखते हैं और वे  हमें पसंद नहीं आता है वे कम है, छोटे हैं या उनका स्वाद अच्छा नहीं है। 
 तो हम आदतन क्या करते हैं ?हममें से ज्यादातर लोग फलों  पर यानी मिलने वाले परिणामों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने लगते हैं। लेकिन वे फल वास्तव में आए कहां से हैं ?  फल तो बीज और जड़ों  से उत्पन्न हुए हैं।  

 जो जमीन के अंदर हैं वह जमीन के ऊपर की चीजों को पैदा करता है। जो दिखता नहीं है वह दिखने वाली चीजों की रचना करता है,  इसका मतलब यह है कि अगर आप फलों को बदलना चाहते हैं ,तो पहले आपको जड़ों को बदलना होगा। अगर आप दिखाई देने वाली चीजों को बदलना चाहते हैं तो पहले आपको अदृश्य चीजों को बदलना होगा। 
 जाहिर है कुछ लोग कहते हैं कि जो दिखता है वही सच होता है। ऐसे लोगों से मैं एक ही सवाल पूछता हूं," आप लोग बिजली का बिल भरने की झंझट क्यों पालते हैं ?"हालांकि आप बिजली को देख नहीं सकते लेकिन अब बेशक इसकी शक्ति को पहचान सकते हैं इसका इस्तेमाल कर सकते हैं अगर आपको इसके अस्तित्व के बारे में किसी भी तरह की शंका हो तो अपनी उंगली बिजली के किसी सॉकेट में डाल कर देख ले मेरा दावा है कि आपकी सारी शंकाएं एक झटके  में काफूर  हो जाएंगी। 
 अपने अनुभव से मैं इतना कह  सकता हूं कि आप इस दुनिया में जो नहीं देख सकते हैं वह किसी भी देखने वाली चीज से ज्यादा शक्तिशाली होता है। आप इस बात से चाहे सहमत हो या ना हो, लेकिन जिस हद तक आप इस सिद्धांत को अपने जीवन में लागू नहीं करते हैं उस हद तक आप को कष्ट उठाना पड़ेगा क्यों? क्योंकि आप प्रकृति के उन नियमों के खिलाफ जा रहे हैं जिनके द्वारा जमीन के नीचे की चीज जमीन के ऊपर की चीज उत्पन्न करती है जिनके द्वारा ना दिखने वाली चीजें दिखने वाली चीजों को उत्पन्न करती है। 

इंसान प्रकृति से ऊपर नहीं है, बल्कि उसका हिस्सा है इसका मतलब यह है कि जब हम प्रकृति के नियमों के अनुरूप चलते हैं और अपनी जड़ों -यानी अपने "आंतरिक संसार"-  पर काम करते हैं तो हमारे जीवन का प्रवाह अच्छा रहता है जब हम ऐसा नहीं करते हैं तो जिंदगी मुश्किल हो जाती है। 

 दुनिया के हर जंगल, हर खेत ,हर बगीचे मैं जमीन के अंदर की चीज़ों ने जमीन के ऊपर की चीजों को पैदा किया है।  इसलिए उग  चुके फलों पर ध्यान केंद्रित करना बेकार है जो फल इस वक्त पेड़ पर लटक रहे हैं ,आप उन्हें नहीं बदल सकते हैं।  हां आप भविष्य में मिलने वाले  फलों को अवश्य बदल सकते हैं। लेकिन ऐसा करने के लिए आपको जमीन की खुदाई करनी होगी जड़ों को मजबूत करना होगा ।

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